बृहस्पति देव की व्रत कथा

इस कथा का मुख्य संदेश यह है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक बृहस्पति देव का व्रत करता है, पीले वस्त्र धारण करता है, पीली वस्तुओं का दान करता है तथा भगवान बृहस्पति की पूजा करता है, उसके जीवन से दरिद्रता, कष्ट और बाधाएँ दूर होती हैं। कथा में एक स्त्री की अवहेलना, उसके कारण आई विपत्तियों तथा बाद में बृहस्पति देव की कृपा से प्राप्त सुख-समृद्धि का वर्णन किया गया है। आप बृहस्पति देव की व्रत कथा देख रहे हैं परमविचार वेबसाइट पर।

बृहस्पति देव की व्रत कथा हर बृहस्पति वार को पढ़े

प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक धनवान साहूकार रहता था। उसके घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी, परंतु उसकी पत्नी अत्यंत कंजूस और घमंडी थी। वह न तो किसी को दान देती थी और न ही किसी साधु-संत का आदर करती थी।

एक दिन भगवान बृहस्पति साधु का वेश धारण करके उसके द्वार पर आए और भिक्षा माँगी। साहूकार की पत्नी ने उन्हें भिक्षा देने से मना कर दिया। कई बार समझाने पर भी उसने कोई दान नहीं दिया। तब साधु रूप में आए बृहस्पति देव ने कहा, “यदि तुम चाहो तो मैं तुम्हारे घर का सारा धन समाप्त कर सकता हूँ।”

स्त्री ने अहंकार से उत्तर दिया, “यदि ऐसा कर सकते हो तो कर दो। धन के कारण ही मुझे घर के कामों से फुर्सत नहीं मिलती।”

कुछ समय बाद उसके घर का सारा धन समाप्त होने लगा। व्यापार में हानि हुई, घर की समृद्धि नष्ट हो गई और परिवार दरिद्रता में जीवन बिताने लगा। भोजन के लिए भी कठिनाई होने लगी।

एक दिन वह स्त्री दुखी होकर बैठी थी। उसी समय पुनः बृहस्पति देव साधु के वेश में उसके घर आए। उन्होंने पूछा, “अब तुम इतनी दुखी क्यों हो?” स्त्री ने अपनी सारी व्यथा सुनाई और कहा कि उसका घर निर्धन हो गया है।

तब बृहस्पति देव ने कहा, “यदि तुम प्रत्येक गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति से मेरा व्रत करोगी, पीली वस्तुओं का दान करोगी, केले के वृक्ष की पूजा करोगी तथा भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का स्मरण करोगी, तो तुम्हारे सभी कष्ट दूर हो जाएँगे।”

स्त्री ने उनकी बात मान ली। उसने विधिपूर्वक बृहस्पतिवार का व्रत करना आरंभ किया। पीले वस्त्र धारण किए, पीले चने और गुड़ का भोग लगाया तथा ब्राह्मणों को दान दिया। धीरे-धीरे उसके घर में फिर से सुख-समृद्धि आने लगी। व्यापार बढ़ने लगा, धन-धान्य की वृद्धि हुई और परिवार सुखपूर्वक रहने लगा।

तब उसे समझ आया कि दान, धर्म और भगवान की भक्ति का कितना महत्व है। उसने जीवनभर बृहस्पति देव की पूजा की और कभी किसी याचक को खाली हाथ नहीं लौटाया।

कथा का फलश्रुति:
जो स्त्री या पुरुष श्रद्धा, विश्वास और नियमपूर्वक बृहस्पतिवार का व्रत करता है, बृहस्पति देव की कथा सुनता है और पीली वस्तुओं का दान करता है, उसके जीवन से दरिद्रता, रोग, शोक और कष्ट दूर होते हैं तथा घर में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।

॥ बृहस्पति देव की जय ॥
॥ ॐ बृं बृहस्पतये नमः ॥

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